गंगा-जमुनी तहज़ीब को बचाने की पहल: शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद शबाब नकवी ने मोरारी बापू और आरएसएस नेता को दिया निमंत्रण
ओम और अली” पुस्तक विमोचन एवं पुण्यतिथि समारोह पर 6 अप्रैल 2025 को सिरसी सादात में होगा ऐतिहासिक आयोजन
स्व. सैयद यूसुफ रज़ा नकवी को श्रद्धांजलि देने के लिए जुटेंगे सम्मानित महापुरुष
मौलाना सैयद शबाब नकवी का संदेश – प्रेम और भाईचारे से ही होगा समाज का विकास
कलम हिन्दुस्तानी ब्यूरो
संभल (सिरसी सादात) । गंगा-जमुनी तहज़ीब भारत की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सौहार्द्र का प्रतीक रही है। इस तहज़ीब को और मजबूत करने तथा सौहार्द्र व एकता का संदेश फैलाने के उद्देश्य से शिया मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सैयद शबाब नकवी ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।
मौलाना सैयद शबाब नकवी ने विश्व को राममय करने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले शिखर संत, सत्य-प्रेम-करुणा के जीवन्त स्वरूप पूज्य मोरारी बापू जी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) गंगा समग्र के राष्ट्रीय सह संपर्क प्रमुख प्रकाश नारायण जी से मुलाकात कर उन्हें एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण दिया।
“ओम और अली” पुस्तक विमोचन एवं पुण्यतिथि समारोह
यह कार्यक्रम 6 अप्रैल 2025, रविवार को उत्तर प्रदेश के संभल जिले के सिरसी नगर पंचायत स्थित मोहल्ला मुंशियान, थाना हजरत नगर गढ़ी में आयोजित किया जाएगा। यह अवसर दो विशेष घटनाओं के उपलक्ष्य में रखा गया है: “ओम और अली” पुस्तक का विमोचन – यह पुस्तक भारतीय संस्कृति की एकता, साम्प्रदायिक सौहार्द्र और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित है। युवा समाजसेवी स्व. सैयद यूसुफ रज़ा नकवी की पुण्यतिथि (बरसी) – स्व. सैयद यूसुफ रज़ा नकवी एक प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने समाज सेवा को अपना जीवन समर्पित किया।
मौलाना सैयद शबाब नकवी का प्रयास
मौलाना सैयद शबाब नकवी का यह कदम हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करता है। उन्होंने मोरारी बापू और आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी से मिलकर इस बात का संदेश दिया कि सभी धर्मों के बीच आपसी सद्भावना और प्रेम को बनाए रखना समय की मांग है। यह पहल धार्मिक सीमाओं को लांघकर एक साझा सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। इस पुस्तक विमोचन एवं पुण्यतिथि समारोह में देशभर के अनेक सम्मानित महापुरुषों, संतों, विद्वानों और समाजसेवियों के शामिल होने की संभावना है। इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्देश्य भारत की विविधता में एकता को दर्शाते हुए आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देना है।
गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूत करने की ऐतिहासिक पहल
भारत की पहचान गंगा-जमुनी तहज़ीब से जुड़ी रही है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम समुदायों ने सदियों से एक साथ मिलकर जीवन यापन किया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से इस विचारधारा को और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। मौलाना सैयद शबाब नकवी का यह प्रयास दर्शाता है कि धर्म और आध्यात्मिकता को जोड़कर समाज में शांति और भाईचारे का संदेश फैलाया जा सकता है। इस कार्यक्रम से निश्चित रूप से धार्मिक सौहार्द्र और एकजुटता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा।

