इमाम बारगाह साक़िये कौसर मेमन सादात में इमाम जाफर सादिक़ की शहादत पर मजलिस
मजलिस को मौलाना अम्मार हैदर ज़ैनपुरी ने किया खिताब
कलम हिन्दुस्तानी : शमीम अंसारी
किरतपुर। इमाम बारगाह साक़िये कौसर मेमन सादात में छठवें इमाम हज़रत जाफर सादिक़ (अ.स) की शहादत की याद में एक मजलिस का आयोजन किया गया। यह मजलिस नमाज़े इशा के बाद आयोजित हुई, जिसमें क्षेत्र के अनेक मोमेनीन ने शिरकत की।
मजलिस की शुरुआत जनाब गौहर अब्बास ने अपने हमनवां के साथ मरसिया ख़्वानी से की, जिसके बाद जनाब निशात हुसैन ने पेशख़ानी पेश की। मुख्य ख़िताब मौलाना अम्मार हैदर ज़ैनपुरी साहब ने किया, जिन्होंने इमाम जाफर सादिक़ (अ.स) के जीवन और योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। मौलाना अम्मार हैदर ने तकरीर में कहा कि इमाम जाफर सादिक़ (अ.स) ने 65 वर्षों की उम्र में लगभग दर्जन भर जालिम बादशाहों का दौर देखा, लेकिन उन्होंने कभी अपने मिशन से पीछे हटने की सोच नहीं रखी। इमाम ने अपने समय में मदीना में एक ऐसा विश्वविद्यालय स्थापित किया था, जहाँ से मिडिल ईस्ट सहित कई देशों के लोग तालीम हासिल करने आते थे। उनके लगभग 6000 शागिर्द थे, जिनमें दूसरे धर्मों के लोग भी शामिल थे। इमाम ने हर वर्ग को इल्म बांटने का कार्य किया और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
आखिर मे मसायब बयान करते हुए मौलाना ने बताया कि 1304 साल पहले, 148 हिजरी में मंसूर दवानिकी ने धोखे से इमाम को ज़हर दिलवाकर शहीद करवा दिया था। मसायब सुनते ही उपस्थित मोमेनीन की आंखें नम हो गईं। मजलिस में गाजी अब्बास ज़ैदी, चचा मोती, ज़फ़रयाब अली, कारी ज़ुल्फ़कार अली, अकबर ज़ैदी, लियाकत हुसैन, ख़ुरशीद ज़मानी, सिप्तै हैदर, और राशिद हुसैन सहित कई मोमेनीन ने शिरकत की और इमाम की याद में आंसुओ का पुरसा पेश किया।
