हिन्दी-उर्दू कारवां अकादमी द्वारा गज़ल कुंभ के भव्य आयोजन मे देशभर से जुटे नामचीन शायर और कवि
कलम हिन्दुस्तानी : नेत्रपाल बघेल
गाजियाबाद, 6 अप्रैल 2025 : हिन्दी-उर्दू कारवां अकादमी के तत्वावधान में कला आकार स्टूडियो, शक्ति खंड-4, इंदिरापुरम में “ऑल इंडिया शायर व कवि सम्मेलन – ग़ज़ल कुंभ” का भव्य आयोजन किया गया। यह सम्मेलन रविवार को प्रातः 10 बजे एन.सी. इंजीनियर श्री खंडेलवाल की अध्यक्षता में प्रारंभ हुआ। इस साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में देशभर के प्रख्यात शायर, कवि और कवयित्रियाँ शामिल हुए और अपने शानदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन बेहद प्रभावशाली अंदाज़ में नईम हिन्दुस्तानी ने किया। उनकी विशिष्ट शैली और उर्दू अदब की गहराई ने माहौल को जीवंत बनाए रखा। वे एक के बाद एक मंच पर शायरों और कवियों को आमंत्रित करते रहे, जिससे श्रोताओं को निरंतर साहित्यिक रस का आनंद मिलता रहा। इस ग़ज़ल कुंभ में देश के विभिन्न कोनों से आए जाने-माने शायर और कवियों ने हिस्सा लिया। प्रमुख शायरों में निसार मलिक (ग़ाज़ियाबाद), सिराज अहमद और चाँद मियाँ (भोपाल), जावेद खान (कोटा, राजस्थान), सरफराज हुसैन ‘फ़राज’ (मुरादाबाद), हकीमुद्दीन (बिजनौर), फारूख बिजनौरी, काजी जाहिर बिजनौरी, जगजीत (बदायूँ), भारत मोर्य (रायबरेली), संतराम (दिल्ली), मुफीद अहमद (कन्नौज), एहतराम सिद्दीकी लखनवी, सृष्टि (दिल्ली), शिवानी (ग़ाज़ियाबाद) और नयन चौधरी शामिल रहे।
कवयित्रियों में मधुबाला जी, संगीता चौहान, अंजली शर्मा और डॉ. सीमा की उपस्थिति रही, जिन्होंने अपनी भावपूर्ण कविताओं और ग़ज़लों से कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। सभी शायरों व कवियों ने अपने अशआर, गीतों और ग़ज़लों के माध्यम से प्रेम, समाज, सुकून और समरसता की भावनाओं को मंच पर बखूबी प्रस्तुत किया। उनके शेर-ओ-शायरी ने उपस्थित श्रोताओं के दिलों को छू लिया और तालियों की गड़गड़ाहट से माहौल गूंज उठा। कार्यक्रम के कन्वीनर नईम हिन्दुस्तानी ने सभी उपस्थित अतिथियों, कवियों और शायरों को मोमेंटो भेंटकर सम्मानित किया और उनका आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पत्रकारिता और मीडिया के क्षेत्र में योगदान देने वाले विपुल सिंह (भारत एक्सप्रेस), उज्ज्वल मिश्रा (भारत एक्सप्रेस), और राधे शर्मा को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर स्थानीय नागरिकों, साहित्यप्रेमियों और गणमान्य व्यक्तियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। “ग़ज़ल कुंभ” का यह आयोजन न केवल एक साहित्यिक उत्सव बनकर उभरा, बल्कि एकता, भाषा और संस्कृति के संगम का प्रतीक भी बना।

