सिरसी में बज़्मे शोआरा ए सादात की मासिक नशिस्त हुई आयोजित
हम अपने क़द से बड़ा कारोबार करते हैं : मीर सादिक
कलम हिन्दुस्तानी संवाददाता
मौहम्मद सादिक
संभल /सिरसी बज़्मे शोअरा ए सादात की मासिक नशिस्त बाबर अली पुत्र स्व.अंसार हुसैन के मकान पर बज़्मे शोअरा ए सादात के तत्वधान में आयोजित की गई महफिल का प्रारंभ मौलाना मोहम्मद अब्बास ने तिलावत ए हदीसे किसा से किया । जबकि महफिल का संचालन ज़ैद सिरसीवी ने किया! महफिल में दी गई पंक्ति पर नगर के शायरों ने अपने-अपने बेहतरीन कलाम पेश किए जिसमे जरीफ हसनैन,नबी हसन सबा , दरोगा शमीम हैदर, ,मास्टर शबाब हैदर,मीर सादिक,अजीम असगर,हाजी काशिफ़ रज़ा, मेहज़र अब्बास, शमीम सिरसिवी, मेहदी रज़ा, हसन अली, अज़ीम सम्भली, जरी अब्बास अरशद जलाल,सलमान रिज़वी,फ़ैज़ हैदर फ़ैज़ी,अली हैदर,तामीर हैदर,गुलाब, मोहसिन, हमज़ा, अमान हैदर, फ़तेह अब्बास, आदि ने अपने बेहतरीन कलाम प्रस्तुत किए जिसको श्रोताओं ने काफ़ी सराहना की। महफिल में काफ़ी बड़ी तादाद में लोग मौजूद रहे और महफिल के आखिर में मुल्क में अमन वा शांति की दुआ की भी की गई।
ज़रीफ़ सिरसीवी ने कहा
ज़रीफ़ पढ़ते रहो रात भर इबादत है
चराग़ बारह हैं हम पर हिसार करते हैं
सबा सिरसिवी ने कहा
करम नवाज़ हो ख़ुद आके तजज़िया करलो
गुलों को कितना परेशान ख़ार करते हैं
दारोगा शमीम सिरसीवी ने कहा
जो कह रहे हैं मोहम्मद को अपने जैसा बशर
हम ऐसे लोगों को जाहिल शुमार करते हैं
मीर सादिक सिरसीवी ने कहा
मकां जिना में बनाते हैं शेर कह कह कर
हम अपने कद से बड़ा कारोबार करते हैं
शमीम सिरसीवी ने कहा
नज़र में रहती है ज़हरा की हर परेशानी….
तबर्रा इसलिए हम बार बार करते हैं
अज़ीम सिरसीवी ने कहा
गवारा कैसे करें इसमतें होँ ना महरम
ये कहके ख़ाक के ज़र्रे हिसार करते हैँ
अरशद जलाल ने कहा
चराग़ करते हैं तक़सीम शहरे ज़ुल्मत में
हुसैन वाले यही कारोबार करते हैं
सलमान रिज़वी ने कहा
सफ़र सुख़न का यूँ मिदहत निगार करते हैं।।
क़लम के अस्प पा फ़न को सवार करते हैं
फैज़ी सिरसीवी ने कहा
ज़रूर आयेगा उनपर ज़वाल ऐ फैज़ी
अज़ा के फ़र्श पे जो इन्तेशार करते हैं
हाजी काशिफ़ रज़ा ने कहा
ख़ुदा की राह में खर्चे से हिचकिचाते हैं
जो खर्च बच्चों पे लाखों हज़ार करते हैं
जरी सिरसीवी ने कहा
अजीब हाल है सद इफ़्तेख़ार करते हैं
ख़ुदा के दीन के दुश्मन से प्यार करते हैं
तमसील सिरसीवी ने कहा
वो नोनिहाल हे इमरान के घराने में
हसीं को दश्त मे जो ज़ुल्फोकार करते
ज़ैद सिरसीवी ने कहा
वफ़ा के लफ्ज़ को वो शर्म सार करते हैं
जो भाई भाई के दिल में दरार करते हैं
अली हैदर तामीर ने कहा
खताएं धोना निदामत के पाक पानी से।
ये काम हुर से ही कुछ होशियार करते हैं
अकबर सिरसीवी ने कहा
बुतूल को वो दिखाएंगे किस तरहां चेहरा
अज़ा ए शाहा में जो इंतेशार करते हैं
सलमान खुर्शीद सिरसीवी ने का
अमल का आईना जो दाग़दार करते हैँ
इमामे वक़्त का क्यों इन्तिज़ार करते हैं
मोहसिन सिरसीवी ने कहा
उठा के लाशा ए अकबर को दोश पर अपने
हुसैन सब्र की सरहद को पार करते है
मेंहदी सिरसीवी ने कहा
बड़ा यकीन है हमको जवाब आएगा
अरीज़ भेज के हम इंतज़ार करते है
अमान रिज़वी सिरसिवी ने कहा
बता ऐ कर्बला आख़िर ये माजरा क्या है
तेरे ख़्याल मुझे बे-क़रार करते हैं

